आज के इस परिवेश में काफी ऐसे भी आशिक है जो अपनी प्रेमिका से सच्ची मोहब्बत करते है मै अभिषेक द्विवेदी अपनी कविता भी उन्ही प्यार करने वालो के लिए लिख रहा हु जो सच में हमारे भगवान के द्वारा हमें दिए हुए सबसे बड़ा वरदान जो की मै समझता हु की वो शायद प्यार है पर अपनी कुछ पंक्तियो को लिख रहा हूँ .
कैसे बतलाऊ प्रिये तुछे की प्यार मै कितना करता हु
ले भरी महफिल में ये इज़हार मै तुझसे करता हु
नहीं संकोच प्रिये है मुछ्को इस इज़हार को करने में
मै तो इस जहाँ में बस स्वीकार तुझी को कर
कौन है तेरा कौन है मेरा इस दुनिया के कोने में
कौन है तेरा कौन है मेरा इस दुनिया के कोने में
आके देख छुपा है कितना दर्द यहाँ मेरे सिने में
तेरे मन की आशा से तेरे मन की अभिलाषा से
जीवन चलना है अब ये तो तेरे ही परिभाषा से
नहीं मिली गर तू मुझको तो दर्द मुझे बड़ा होगा
गर जो न हुआ मेरा तो कभी किसी का ना होगा
क्यों डरती हो प्रिए साथ यहाँ मेरे संग चलने में
नहीं साथ गर यहाँ अपना तो बड़ा मजा संग मरने में .